हमारे बारे में

आज देश के लगभग हर राज्य में पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन हो रहा है। सभी समाज की किसी न  किसी बुराई आदि को मिटाने के लिए प्रयासरत हैं। इन पत्रिकाओं ने  जो समाज को रोशनी  खलाई है वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है।

इन पत्रिकाओं में बहुत से संपादक ऐसे भी हैं, जो  समाज की बुराईयों के साथ-साथ संस्कृति और यहाँ के रीति-रिवाजों को बचाने में मदद कर  रहे हैं। इनके इस कार्य को नमन।

यहाँ पर जो आंचलिक भाषा साहित्य पत्रिका का प्रकाशन  करने की शुरूआत की गई है वह इसी बात को ध्यान में रखते हुए की गई है कि हम अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों को इस पत्रिका के माध्यम से आने वाली पीढ़ी तक पहुंचा सकें ताकि जो हमारी युवा पीढ़ी पाश्चात्य की चकाचौंध में गम हो गई है वह उस चकाचौंध से निकलकर बाहर आए और अपनी संस्कृति को पहचाने।

हमारी युवा पीढ़ी को वापिस हमारे रीति-रिवाजों और संस्कृति की तरफ आकर्षित कर इसको अर्थात संस्कृति को संरक्षित करना ही इस पत्रिका का मुख्य उद्देश्य हमारे साहित्यकार अपनी अनूठी भूमिका  निभा सकते हैं। इसी मंगलकामना के साथ….

आपका


नवल पाल प्रभाकर ’’दिनकर’‘